
प्रिय दोस्तो !
आज 31 दिसंबर है यानि जाते हुए साल का आख़िरी दिन… आज हमें इसे विदा करना है, अलविदा कहना है… और नये साल 2011 को खुशामदीद कहना है… उसका स्वागत करना है… वर्ष 2010 जैसा भी रहा, इसने हमें जो कुछ भी दिया, उसे हमने स्वीकार किया। चाहे वे सुख भरे दिन थे अथवा दुख-तकलीफ़ों से भरे दिन… चाहे सपनों का टूटना था या हमारे भीतर नई आशाओं का बीजारोपण… जो कुछ भी इस जाते वर्ष में हमने पाया या खोया, उसका हमें इस विदायगी के समय कोई शिकवा-गिला नहीं करना है और इसे खुशी-खुशी विदा करना है… इसे अलविदा कहना है। जो कमियाँ- खामियाँ रह गईं, जो कार्य अधूरे रह गए, उन्हें नए साल में पूरा करना है। आओ इस नव वर्ष 2011 का हम इस विश्वास के साथ भरपूर स्वागत करें कि इस नये साल में हमारे अन्दर की सारी कालिमाएं खत्म होंगी… घृणा- द्वेष और नफ़रत की बीज नष्ट होंगे, हमारे दिलों में प्रेम और सोहार्द के सोते फूटेंगे… नकारात्मक्ता को छोड़ सकारात्मकता को अपनाएँगे…अपने चारों ओर खुशहाली का वातावरण सिरजेंगे… अपने लिए ही नहीं ,ओरों के लिए भी जीना सीखेंगे… जो असहाय हैं, निर्बल हैं, गरीब हैं, उनके लिए सम्बल बनेंगे… मानवता के विरोध में जो शक्तियाँ खड़ी हैं, उनका मिलजुल कर मुकाबला करेंगे… विश्व का हर प्राणी अपने अपने मोर्चे पर शांति और बंधुत्व की स्थापना में अपना योगदान देगा… अपने समाज, देश और विश्व को और बेहतर बनाएंगे…
आप सबको नववर्ष 2011 की मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ… यह नया साल आपके लिए सुखमय हो, मंगलमय हो, सुख-समृद्धियों से भरा हो…
सुभाष नीरव
आज 31 दिसंबर है यानि जाते हुए साल का आख़िरी दिन… आज हमें इसे विदा करना है, अलविदा कहना है… और नये साल 2011 को खुशामदीद कहना है… उसका स्वागत करना है… वर्ष 2010 जैसा भी रहा, इसने हमें जो कुछ भी दिया, उसे हमने स्वीकार किया। चाहे वे सुख भरे दिन थे अथवा दुख-तकलीफ़ों से भरे दिन… चाहे सपनों का टूटना था या हमारे भीतर नई आशाओं का बीजारोपण… जो कुछ भी इस जाते वर्ष में हमने पाया या खोया, उसका हमें इस विदायगी के समय कोई शिकवा-गिला नहीं करना है और इसे खुशी-खुशी विदा करना है… इसे अलविदा कहना है। जो कमियाँ- खामियाँ रह गईं, जो कार्य अधूरे रह गए, उन्हें नए साल में पूरा करना है। आओ इस नव वर्ष 2011 का हम इस विश्वास के साथ भरपूर स्वागत करें कि इस नये साल में हमारे अन्दर की सारी कालिमाएं खत्म होंगी… घृणा- द्वेष और नफ़रत की बीज नष्ट होंगे, हमारे दिलों में प्रेम और सोहार्द के सोते फूटेंगे… नकारात्मक्ता को छोड़ सकारात्मकता को अपनाएँगे…अपने चारों ओर खुशहाली का वातावरण सिरजेंगे… अपने लिए ही नहीं ,ओरों के लिए भी जीना सीखेंगे… जो असहाय हैं, निर्बल हैं, गरीब हैं, उनके लिए सम्बल बनेंगे… मानवता के विरोध में जो शक्तियाँ खड़ी हैं, उनका मिलजुल कर मुकाबला करेंगे… विश्व का हर प्राणी अपने अपने मोर्चे पर शांति और बंधुत्व की स्थापना में अपना योगदान देगा… अपने समाज, देश और विश्व को और बेहतर बनाएंगे…
आप सबको नववर्ष 2011 की मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ… यह नया साल आपके लिए सुखमय हो, मंगलमय हो, सुख-समृद्धियों से भरा हो…
सुभाष नीरव